इरा ,
हैलो ,हैलो आवाज़ आ रही है?
जवाब दो इरा मेरी आवाज़ आ रही है?
हां ,सिड तुम्हारी आवाज़ तो आ रही है पर ।
पर क्या इरा?
तुम नहीं आ रहे हो।यही कहने के लिए तो तुमने कॉल किया था ना।है ना?
इरा समझो ना……। हालात ही ऐसे बन पड़े हैं कि चाह कर भी नहीं आ पा रहा हूं। कोविड़ फिर से फैल रहा है और उड़ानों को लेकर गाइड लाइन भी बड़ी सख़्त हो गई हैं।तुम्हें पता है इरा नए शोध कहते हैं कि ये नया वैरिएंट भारतीयों पर उतना घातक नहीं है।हमारे डीएनए में कुछ ऐसा है जिसकी वजह से हमारी इम्यूनिटी बाकियों से काफ़ी बेहतर है।
जानती हूं सिड हमारी इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग है कोरोना उतना असर नहीं करेगा हम पर।
सिड तुम तो इम्यूनिटी पर ही शोध कर रहे हो ना। सुनो ना ,मेरे लिए भी ऐसी वैक्सीन ईजाद कर दो ना कि तुम्हारे ना आने की ख़बर का मुझ पे असर ही ना हो ।इतनी इम्यून हो जाऊं कि तुम्हारे आने ना आने से फ़र्क पड़ना ही बंद हो जाए।पूरे पूरे साल तुम्हारा इंतज़ार और अंत हासिल क्या ?फिर से नया साल नया इंतज़ार।और ऐसे पता नहीं कितने साल……….
सिड कहते हैं दर्द पुराना हो जाता है तो उसकी तासीर बदल जाती है फिर वो इतना जानलेवा नहीं रहता ।पर हर साल तुम्हारे आने की उम्मीद जब इंतज़ार में तब्दील हो जाती है तो इसकी तासीर को पहले से भी ज़्यादा सख़्त बना देती है। सिड साल दर साल ये बढ़ता दर्द अब बर्दाश्त नहीं होता।plz बना दो मेरे लिए ऐसी वैक्सीन कि इस दर्द का असर होना बंद हो जाए।कर दो ना मुझे इम्यून ……….
इरा …………..बस इतना ही कहूँगा, मैं कभी नहीं चाहूंगा
कि इस दर्द का असर कभी भी कम हो।इंसान बड़ा स्वार्थी होता है इरा।दर्द की शक्ल में सही पर मैं हर वक्त तुम में मौजूद तो रहता हूं।कुछ दर्द अच्छे हैं इरा
ईश्वर तुम्हें कभी इतना इम्यून ना करे
तथास्तु,तथास्तु तथास्तु……..(दोनो ना मिले तो क्या पर स्वर तो मिल रहे थे)
दोनों एक ही स्वर में फोन के दोनो छोर पर बुदबुदा रहे थे
Umda abhivyakti
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